*मौत के साये में खेती*
*गाँवों में ‘सड़े-गले’ बिजली के पोल,दो साल बाद भी बिजली का काम*
*अधिकारी की मेहरबानियां से केबल मीन्स और व्यापारियों की ‘खाना पकाने की चीजें’*
*मुकेश अहिरवार राजगढ़*
नरसिंहगढ़ तहसील के ग्रामीण क्षेत्र में बिजली के गोदामों ने किसानों और आम नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल दिया है। वर्षों पुराने, साडे-ग्ले लकड़ी और लोहे के खंभे, जमीन को छूते और जगह-जगह पर टूटे तार, और आड़े-तिरछे जर्जर खंभे—यह नजारा किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रहा है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि वे ‘मौत के साए’ में खेती करने को मजबूर हैं। जरा-सी हवा हो या बारिश में बिजली के तार गिराने या पोल गिराने का डर लगातार बना रहता है, जिसके कारण खेत में काम करने वाले और इंसानों, दोनों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
दो साल पहले हुआ था टेंडर, लेकिन काम सिर्फ कागजों पर!
मामला तब और गंभीर हो गया, जब पता चला कि लगभग दो साल पहले पूर्व नरसिंहगढ़ तहसील के हर गांव में बिजली के केबल का टेंडर जारी किया गया था। इस टेंडर का मुख्य उद्देश्य पुराना, मजबूत इन्सुलेट केबलों को नया और मजबूत बनाना था, ताकि बिजली की चोरी और साझेदारी, दोनों को खरीदा जा सके।
लेकिन ज़मीनी लैपटॉप वाली हैं।
>आरोप का आरोप है: “ठेकेदार ने सिर्फ खाना बनाने की दुकान की है। कुछ ही जगह पर नाम मकान का काम दुकान बिल के पास किया गया है। अधिकांश गांवों में आज भी पुराने और जर्जर तार लटके हुए हैं। आड़े-ते-धीमे बिजली के पोल इस बात का सबूत है कि न तो पोल खोले गए और न ही उन्हें ठीक से अलग किया गया।”
जुगाड़ की बिजली से चल रही है गांव
स्ट्रीट व्यवस्था का सीधा असर बिजली आपूर्ति पर पड़ रहा है। लगातार-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या से परेशान ग्रामीण अब बिजली विभाग के तकनीकी विभाग को ताक पर रखने को मजबूर हैं।
यह ‘जुगाड़’ जबरदस्ती इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ग्रामीण इलाकों में बिजली के तार और पोल की स्थिति इतनी खराब है कि वैध कनेक्शन लेना भी कई बार खतरनाक साबित हो सकता है।
विभाग की शैलियाँ और सुरक्षा पर सवाल
यह पूरा मामला बिजली विभाग की विविधता और टेंडर प्रक्रिया में शामिल है। जब करोड़ों रुपए का टेंडर चुकाया गया, तो फिर दो साल बाद भी ग्रामीण क्षेत्र की बिजली व्यवस्था जस की तस क्यों है? ये एक बड़ा सवाल है.